सेंट्रल मार्केट: एक बेरोजगार और बेघर व्यापारी की दिल को छू लेने वाली कहानी

  • [By: PK VERMA || 2026-05-20 09:01 IST
  • 37
सेंट्रल मार्केट: एक बेरोजगार और बेघर व्यापारी की दिल को छू लेने वाली कहानी

मैं एक ऐसे आदमी से मिला जिसका घर दुकान सेंट्रल मार्केट शास्त्रीनगर मेरठ में था, जो आवास विकास परिषद के भ्रष्ट अधिकारियों के चलते ध्वतीकरण की जद में आया और कर दिया गया ध्वस्त। एक झटके में सारे सपने, सारे ख़्वाब और आने वाला मुस्तकबिल यानी भविष्य। सब कुछ तबाह और ख़त्म।

लेकिन इस व्यक्ति ने कभी प्रदर्शन या धरने में हिस्सा नहीं लिया। और न ही मधुमक्खियों की तरह हाथों में माइक लिए दुखो के पहाड़ के नीचे दबे लोगों से पूछते कुछ बेगैरत यूट्यूबर्स। आपका घर दुकान पर बुलडोजर चल गया कैसा महसूस हो रहा है। बेहद बेशर्मी ओर बेग़ैरत भरा सवाल। 

इन्हीं सब के चलते वह शख्स कभी किसी धरना प्रदर्शन में नहीं गया ओर न ही किसी माइक के सामने अपना दुखड़ा रोया। क्योंकि वह जनता था कि रो धोकर कुछ नहीं होने वाला। बाप को मजबूर देखकर पत्नी ओर बच्चों को संभालना बहुत मुश्किल होता। इसलिए वह खामोशी के साथ अपने परिवार के साथ खाता पिता और खामोशी की चादर ओढ़कर सो जाता। अपनी दुकान से उसने इतनी तो सेविंग कर ही ली थी कि कुछ साल परिवार की रसोई चल सके। इसीलिए वह खामोश रहा। एक दम खामोश। न रोया और न ही चिल्लाया। जबकि कुछ पीड़ित दुकानदारों ने अपनी तबाही और पीड़ा को राजनीतिक रंग में रंग लिया था। नेता आते और घड़ियाली आंसू बहाकर निकल जाते। उसे पता था कि ये सभी नेता सिर्फ नाटक कर रहे है। उन्हें किसी के बेरोजगार होने या बेघर होने से कोई मतलब नहीं। मतलब सिर्फ वोट से था।

खैर, वह हफ्ते दस दिन तो खामोश रहा। परिवार को पूरा वक्त दिया। व्यापार के समय परिवार को वक्त देना भी बड़ा मसला होता था। अभी तो वक्त ही वक्त है।

लेकिन बचत को कब तक खर्च किया जाए। बचत कितनी भी बड़ी और अधिक क्यों न हो एक दिन खत्म हो ही जाती है। इसलिए उसने व्यापारी का चौला उतार फेंक दिया।

वह अब एक प्राइवेट कॉलेज में क्लर्क के रूप में काम करता है। तनख्वाह इतनी तो थी कि चार लोगों का परिवार आसानी से गुज़र बसर कर सकता था। 

अब न तो उसे किसी को तनख्वाव देनी थी और न ही किसी की देनदारी। और न ही सरकार को सेल्स टैक्स। अब वह व्यापारी नहीं था। अब वह व्यापार के घाटे नुकसान से बहुत दूर था। 

कई लोगों को नौकरी और कारोबार देने वाला वह व्यापारी अब खुद एक संस्था में नौकरी कर रहा था।

आज दो महीने बाद वह अपनी नोकरी से घर वापिस आते समय अपनी पुरानी दुकान के आगे से गुजरता है। उसकी दुकान के बाहर खड़े कुछ लोग किसी बात पर ठहाका लगा रहे थे। वह अपनी गायब हो चुकी दुकान की और देखकर हल्की मुस्कान बिखेरता आगे बढ़ गया।

TAGS

#

SEARCH

RELATED TOPICS