10 दिन में ही बिखर गई सड़क, रोड़ी बाहर, 25 मीटर तक पत्थर ही नहीं डाला, दो साल पुरानी सीआरसी पर कर दिया 20 लाख का भुगतान लखनऊ पहुंचा मामला

  • [By: Meerut Desk || 2025-12-05 01:39 IST
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10 दिन में ही बिखर गई सड़क, रोड़ी बाहर, 25 मीटर तक पत्थर ही नहीं डाला, दो साल पुरानी सीआरसी पर कर दिया 20 लाख का भुगतान लखनऊ पहुंचा मामला

मेरठ। जहाँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ जीरो टॉलरेंस की नीति पर सख्ती से काम कर रहे है, वहीँ कई प्रदेश के कई विभागों में भ्रष्टाचार को लेकर शायद बड़ी होड़ लगी है कि सबसे बड़ा भ्रष्टाचारी कौन। ऐसा ही एक मामला मेरठ के लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड से आया है जिसमे बेहद घटिया निर्माण सामग्री से सड़क की मरम्मत (पैचवर्क) की गई की वह सड़क 10 दिन में ही बिखर गई इतना ही नहीं विभाग के अधिकारियों ने षड्यंत्र रचकर बिना तारकोल के eWay बिल का कागज लगाये और दो साल पुरानी आरसीसी भुगतान फाइल में लगवाकर 20 लाख रूपये का भुगतान कर दिया। वास्तव में प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग भ्रष्टाचार का अड्डा बनता जा रहा है। रूल्स एंड रेगुलेशन कचरे के डब्बे में डाल षडयंत्र रच कर गलत तरीके से भुगतान किए जा रहे है। मोटे कमिशन के लालच में सरकारी खजाना लुटाया जा रहा है। अधिक कमीशन के लालच में दो साल पुरानी सीआरसी यानी दो साल पुराना तारकोल उसमें भी साइट कही और और प्लांट से सप्लाई कही और होती है। कोई eWay बिल नहीं। लेकिन रूटीन कमीशन से अधिक कमीशन मिले तो ऐसे भ्रष्टाचार और सरकारी खजाने की बर्बादी कर ही दी जाती है। और ऐसा ही हुआ।

दो साल पुरानी सीआरसी पर बीस लाख का भुगतान की उच्च स्तरीय जांच कराने के लिये मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से शिकायत की जा रही है। यह सिर्फ एक मामला सामने आया है न जाने कितने भ्रष्टाचार के मामले खुल सकते है जिनमें सरकारी खजाने से करोड़ों रुपयों की बंदरबाट की गई होगी। यह उच्च स्तरीय जांच का विषय है।

लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड मेरठ के अधिशासी अभियंता से जब व्हाट्सएप पर इस बाबत जानकारी के लिय सवाल भेजा तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। संभावना जताई जा रही है कि 3-4 दिन पूर्व किए गए 20 लाख के भुगतान की फाइल में से ऐसे प्रपत्रों को गायब किया जा सकता है जिनके चलते किए गए भ्रष्टाचार का पर्दाफाश हो सकता है। यह बहुत गहन जांच का विषय है। किसी एजेंसी से अगर इस प्रकरण की जांच की जाती है तो कई अधिकारी और कर्मचारी फंस सकते है।

क्या है मामला: दरअसल पीडब्ल्यूडी प्रांतीय खंड मेरठ को अपने कार्यक्षेत्र चेतावला घाट से मवाना मखदुमपुर तक की मुख्य सड़क का मरम्मत कार्य (पेचवर्क) कराना था जिसका बजट बीस लाख रुपया था। ठेकेदार ने बेहद घटिया निर्माण सामग्री का इस्तेमाल करते हुए सड़क पर मरम्मत का कार्य कर दिया जो 10 दिन भी नहीं टिक सका। घटिया सड़क निर्माण की जाँच करने के बजाय प्रांतीय खंड पीडब्ल्यूडी मेरठ में 3-4 दिन पहले एक बीस लाख रुपए का भुगतान मखदुमपुर की एक सड़क पर पैच वर्क यानी मरम्मत कार्य करने पर ठेकेदार को दो साल पुरानी सीआरसी के आधार पर कर दिया गया। यानी दो साल पुराना घटिया श्रेणी का तारकोल सड़क के पेचवर्क कार्य में इस्तेमाल किया गया जिसके चलते पेचवर्क कार्य होने के 10 दिन बाद ही सड़क के गड्ढों से रोड़ी बाहर फैल गई। ग्रामीणों ने लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए हंगामा कर दिया। ग्रामीण विभाग के अधिकारियों और संबंधित ठेकेदार पर कार्यवाही की मांग करने लगे।

खादर क्षेत्र के लगभग दो दर्जन गांवों को जोड़ने वाले मुख्य मार्ग का प्रांतीय खंड पीडब्ल्यूडी द्वारा लगभग दस दिन पूर्व मरम्मत कार्य (पैच वर्क) कराया गया था। लेकिन दस दिनो में ही यह मुख्य मार्ग तारकोल घटिया (दो साल पुराना) होने के चलते सड़क की रोड़ी बिखर गई। सड़क परतें उखड़ने से फिर जर्जर हो गया है। इसके अतिरिक्त गांव से मुख्य मार्ग भी जर्जर अवस्था में है। ग्रामीणों ने लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड मेरठ पर भेदभाव करने का आरोप लगाया है।

दरअसल चेतावली से नया गांव मोड़ तक जाने वाला मार्ग खादर क्षेत्र के लगभग दो दर्जन गावों को मुख्यालय से जोड़ने वाला मुख्य मार्ग है। ग्रामीणों के अनुसार बाढ़ और बारिश के दौरान यह संपर्क मार्ग पूरी तरह से जर्जर और गढ्डों में बदल गया है। अतः इस मार्ग पर आए दिन हादसे हो रहे है। इसकी शिकायत खादर क्षेत्र के लोगों ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों से भी की थी। इसके बाद यहां पर मरम्मत कार्य शुरू कराया गया। मरम्मत कार्य में भी बड़ी लापरवाही बरती गई। लोक निर्माण विभाग ने सड़क के किनारों की मरम्मत नहीं कराई है।

सड़क में 25 मीटर तक पत्थर ही नहीं है: खादर क्षेत्र के सुंदर सिंह, अशोक चौहान और हरविंदर सिंह ने हमारे संवाददाता को बताया कि तारापुर बाजार के बीच सड़क में 25 मीटर तक तो पत्थर ही नहीं है जिसके चलते वहां पर गहरा गढ्ढा बन गया है। बारिश के दौरान यहां से निकलना मुश्किल हो जाता हैं। इन सब के बावजूद लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड ने यहां मरम्मत कार्य नहीं कराया। इतना ही नहीं जहां पर मरम्मत कार्य कराया गया था। वहां पर सड़क दस दिनो में ही फिर टूट कर बिखर गई। ग्रामीणों के अनुसार मरम्मत की गई यह सड़क दस दिन भी नहीं टिक सकी। लोगों ने लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड के अधिकारियों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा कि सड़क के मरम्मत के कार्य में विभाग ने भारी धांधली की है। अनियमितताएं की है कि सड़क 10 दिन भी नहीं रोक सके

eWay बिल भी नहीं: खादर क्षेत्र में सड़क मरम्मत कार्य के लिए तारकोल मवाना साइट से लेना चाहिए था। लेकिन ठेकेदार ने पीडब्ल्यूडी अधिकारियों की मिलीभगत से तारकोल खारखौदा स्थित साइट/प्लांट से खादर क्षेत्र तक ले जाया गया। पीडब्ल्यूडी अधिकारियों ने ठेकेदार को बीस लाख का भुगतान करते समय तारकोल के ट्रांसपोर्ट का eWay बिल भी भुगतान की फाइल में नहीं लगाया और 2 साल पुरानी सीआरसी को भुगतान की फाइल में लगाकर भुगतान कर दिया। और इस प्रकार षडयंत्र रचकर पीडब्ल्यूडी अधिकारियों ने सरकारी खजाने से बीस लाख रूपये की बंदरबाट कर ली। पीडब्ल्यूडी अधिकारियों के इस भ्रष्टाचार का पर्दाफाश होने से विभाग में हड़कंप मच गया है। इन्हें अपनी गर्दन फंसती नजर आ रही है। पूरी संभावना है कि भुगतान हो चुकी फाइल भ्रष्टाचार भरे कागजों को गायब किया जा सकता है।

सोचने वाली बात यह है कि यदि पिछले तीन सालों में पीडब्ल्यूडी प्रांतीय खंड मेरठ द्वारा पैच वर्क की गई सड़कों की निर्माण सामग्री की गुणवत्ता और भुगतान की फाइलों की उच्च स्तरीय जांच की जाए तो शायद कई अधिकारियों की बाकी जिंदगी जेल की सलाखों के पीछे बीते।

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