निर्भीक और निष्पक्ष निर्वाचन अधिकारी अमित भार्गव एक मिसाल, सभी को इनसे सिखने की जरूरत

  • [By: Meerut Desk || 2025-11-20 00:43 IST
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निर्भीक और निष्पक्ष निर्वाचन अधिकारी अमित भार्गव एक मिसाल, सभी को इनसे सिखने की जरूरत

मेरठ। बेचारी, बेबसी, मजबूरी और मायूसी भरे चेहरे लिए नगरायुक्त सौरभ गंगवार और भाजपा महापौर हरिकांत अहलूवालिया खामोश खड़े रहे। निगम के एक कर्तव्यनिष्ठ और बेहतरीन अधिकारी के साथ भाजपा के कुछ नेता तू-तड़ाक और बदतमीजी करते रहे लेकिन निगम के सबसे बड़े अधिकारी नगर आयुक्त सौरभ गंगवार आईएएस, ख़ामोशी के साथ अपने सबसे काबिल और बेहतरीन अधिकारी के साथ बदतमीजी होते देखते रहे और बस देखते रहे। ऐसा अधिकारी/संरक्षक किस काम का जो अपने अधिनिष्ठ अधिकारी/बच्चों के साथ खड़ा न रह सके। लेकिन नगर निगम कार्यकारिणी चुनाव 2025 के निर्वाचन अधिकारी अमित भार्गव ने अकेले ही सारे हंगामे का पूरी हिम्मत, साहस, विवेक और अपनी क़ाबिलियत के साथ सामना किया। बिना झुके, बिना डरे और बिना थमे।

लगातार हंगामा होने और दवाब में आने से बेहतर निर्वाचन अधिकारी अमित भार्गव ने तुरंत निगम कार्यकारिणी के चुनाव को निरस्त करने की घोषणा कर दी। और गर्व से अपना मस्तक ऊँचा किये वहां से चले गए। 

जिस प्रकार से भाजपा के क्षेत्रीय नेताओं, विधायक, सांसद आदि चुनाव अधिकारी को मेज के चारों तरफ घेर कर खड़े होकर तेज आवाज में बहस करना, और क्षेत्रीय प्रदाधिकारी द्वारा तू-तड़ाक से बात करना, आरोप-प्रत्यारोप लगाना चुनाव अधिकारी अमित भार्गव की जगह कोई दूसरा होता तो शायद वह टूट जाता या झुक जाता। ऐसे निर्भीक एवं निष्पक्ष निर्वाचन अधिकारी को सेल्यूट। निष्पक्ष चुनाव कैसे कराये जाते है वास्तव में देश में बड़े-बड़े चुनाव कराने वाले निर्वाचन अधिकारियों को अमित भार्गव से सीखना चाहिए और बहुत कुछ सीखना चाहिए। 

क्या है मामला: दरअसल  17 नवंबर 2025 को नगर निगम कार्यकारिणी का चुनाव होना था। चुनावी मैदान में कुल 9 प्रत्याशी थे। हंगामे और बगावती माहौल में शाम 5:30 बजे तक मतदान चला। कुल 97 वोट के सापेक्ष 96 वोट पड़े। शहर से बाहर होने के चलते मेरठ दक्षिण विधायक सोमेंद्र तोमर वोट डालने नहीं आ सके। चुनाव में निर्धारित मानक पूरे नहीं करने पर निर्वाचन अधिकारी ने 4 मतपत्रों को निरस्त कर दिया। इसमें भाजपा सभासद सत्यपाल सिंह का भी मतपत्र शामिल था। जैसे ही बचे हुए 92 मतपत्रों की गिनती शुरू हुई वहां हंगामा और शोरशराबा शुरू हो गया। भाजपा के आक्रोशित जानप्रतिनिधियों ने पूरी चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठा दिया। 

भाजपा के राज्यसभा सांसद लक्ष्मीकांत बाजपेई ने निर्वाचन अधिकारी मुख्य नगर लेखा परीक्षक से सख्त भाषा में नाराजगी जताई। इनके साथ ही अन्य तमाम भाजपा नेता जोर जोर से आरोप लगाने लगे। एक क्षेत्रीय भाजपा नेता ने तो तू-तड़ाक की भाषा का इस्तेमाल कर दिया। इस पुरे हंगामे की तमाम वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। निर्वाचन अधिकारी पर चिल्लाते हुए भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि पूरी चुनाव प्रक्रिया ही दूषित है। पहले प्रस्ताव और अनुमोदक और फिर मतपत्र निरस्त करने की प्रक्रिया में नियमों का पालन नहीं किया गया है।

यह भी आरोप लगाया गया कि मतपत्रों के पीछे नंबरिंग नहीं की गई थी। यह भी आरोप लगाया गया कि प्रारंभिक मतगणना में भाजपा सभासद सत्यपाल सिंह को 12 वोट मिले और भाजपा के बागी सभासद संजय सैनी को भी 12 वोट मिले। सत्यपाल सिंह का एक वोट निरस्त होने के बाद उसके पक्ष में अब सिर्फ 11 वोट ही बचे। यानि बागी सभासद संजय सैनी को एक वोट अधिक। बस यही से हंगामा शुरू हो गया। भाजपा के अन्य 4 सभासदों अजय चंद्र, निरंजन वाल्मीकि, रेशमा सोनकर और पंकज गोयल को 13-13 वोट मिले थे। इतना ही नहीं विपक्ष के सभासद ने तो प्रारंभिक मतगणना में लगभग खुद को ही विजयी मानकर माला भी पहन ली थी। खैर चुनाव निरस्त कर दिया गया। इस दौरान मेरठ कैंट विधायक और नगर निगम महापौर भी वहां पर उपस्थित थे। 

ख़ामोशी के साथ खड़े नगर आयुक्त सौरभ गंगवार की मौजूदगी में निर्वाचन अधिकारी अमित भार्गव ने चुनाव को निरस्त करने की घोषणा कर दी। लेकिन मामला यहाँ भी शांत नहीं हुआ भाजपा नेता ने माइक और कैमरे के सामने निर्वाचन अधिकारी को बोला कि कैमरे पर क्या क्या बोलना है। यह वीडियो भी आपको जरूर देखनी चाहिए। 

इस हंगामे के दरमियान भाजपा पार्षद संजय सैनी को पार्टी से निलंबित कर दिया गया। इन पर आरोप था कि बिना पार्टी की सहमति के संजय सैनी ने पार्टी प्रत्याशी के खिलाफ नामांकन किया था। भाजपा महानगर अध्यक्ष ने सभासद संजय सैनी को पार्टी से निलंबित कर दिया। इसके बाद बागी संजय सैनी ने भी सोशल मीडिया पर अपने निलंबन से संबंधित एक वीडियो जारी कर दी। 

खैर, चाटुकार और कर्तव्यविमुख अधिकारी को कोई याद नहीं करता लेकिन ईमानदार से कर्तव्य का पालन करने वाले अधिकारी के अफ़साने लिखे जाते है। यह बात किसी को भी भूलनी नहीं चाहिए। इस चुनाव के निर्वाचन अधिकारी तारीफ के काबिल है जिन्होंने पूरी चुनाव प्रक्रिया में न तो कोई गड़बड़ी होने दी और न ही किसी नेता के दवाब में आये। ऐसे अधिकारी से बहुत कुछ सिखने की जरुरत है। हम सभी को। 

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इस आलेख के लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं नमो फॉर पीएम (2013) और राष्ट्रिय स्वयंसेवक संघ: पढ़ो, समझो और जुडो  (2019) प्रसिद्ध पुस्तकों के लेखक पीके वर्मा है। 

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