विद्या यूनिवर्सिटी के मालिक प्रदीप जैन के सरकारी जमीन पर कब्जे के विरोध में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठी भाकियू इंडिया

  • [By: Meerut Desk || 2025-11-15 01:28 IST
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विद्या यूनिवर्सिटी के मालिक प्रदीप जैन के सरकारी जमीन पर कब्जे के विरोध में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठी भाकियू इंडिया

मेरठ। बागपत रोड स्थित विद्या यूनिवर्सिटी के संचालकों पर ग्राम पंचायत की लगभग 150 करोड़ रूपये की सरकारी जमीन कब्जाने के विरोध में सदर तहसील में किसानों का अनिश्चितकालीन धरना शुरू हो गया है है। 

क्या है मामला: दरअसल जनपद की सदर तहसील के गांव पांचली में 150 करोड़ रूपये कीमत की 20 बीघा सरकारी जमीन को तहसील के अधिकारी कर्मचारियों की मिलीभगत से विद्या यूनिवर्सिटी के मालिक प्रदीप जैन एवं अन्य के नाम करने के आरोप में भाकियू इंडिया के कार्यकतार्ओं का अनिश्चितकालीन धरना तहसील परिसर में जारी है। भाकियू नेताओ का कहना है कि जब तक हमारी शिकायत पर ठोस कार्रवाई शुरू नहीं होती है हमारा धरना जारी रहेगा।

भाकियू इंडिया के युवा मोर्चा राष्ट्रीय अध्यक्ष आनंद विकल ने बताया कि हमने अपनी 12 बिंदुओं का एक मांग पत्र तहसील अधिकारियों को सौंपा है। लेकिन हमारे उन बिंदुओं पर ये जांच करने को राजी नहीं है। हमारी मांग ये है कि इनपर जांच होनी चाहिए और जांच में अगर यह पाया जाता है कि जमीन पर जिसका कब्जा है वह दोषी है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। आनंद विकल ने आरोप लगाया कि तहसील अधिकारी सरकारी जमीन पर कब्ज़ा करने वाले विद्या यूनिवर्सिटी के मालिक प्रदीप जैन से मिले हुए है। हमारे पास जो नायब वार्ता के लिए आए थे वह भी बिना किसी जांच और कागज के हमारे बीच पहुंचे ऐसे में प्रबंधन सिर्फ अपनी गलती को छिपाने का काम कर रहा है।

किसानों द्वारा सदर तहसील में एसडीएम ऑफिस के सामने ही भट्टी चढ़ाकर खाना बनाया जा रहा है। उनका कहना है कि हम किसी व्यक्ति विशेष या अपनी समस्या को नहीं बल्कि सरकारी संपत्ति पर कब्जे की समस्या लेकर आए हैं जिसका समाधान कराने के बाद ही हम यहां से उठेंगे। किसानों ने कहा कि मुख्यमंत्री मंच से भी यह घोषणा करते हैं कि सरकारी भूमि पर कब्जा करने वाले लोगों पर बुलडोजर की कार्रवाई की जाएगी। हम ये पूछना चाहते हैं कि क्या सिर्फ असलिए कि वह लोग भाजपा से जुड़े है तो उन पर कार्रवाई नहीं की जा रही है। हाईकोर्ट का भी आदेश है कि ऐसी भूमि को 15 दिन में कब्जा मुक्त किया जाना चाहिए इसके बाद भी तहसील अधिकारी खामोश हैं।

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