भ्रष्टाचार खुलने के भय से जनसूचना का जवाब नहीं दे रहे आवास विकास संपत्ति अधिकारी सुनील कुमार शर्मा 

  • [By: Meerut Desk || 2026-01-03 01:10 IST
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भ्रष्टाचार खुलने के भय से जनसूचना का जवाब नहीं दे रहे आवास विकास संपत्ति अधिकारी सुनील कुमार शर्मा 

मेरठ। आवास एवं विकास परिषद के कुछ अधिकारी भ्रष्टाचार में आकंठ डूब चुके है। मामला आवास एवं विकास परिषद् के संपत्ति अधिकारी कार्यालय से संबंधित है। एक जनसूचना कार्यकर्त्ता द्वारा आवास एवं विकास परिषद से भूखंड नीलामी प्रक्रिया की जानकारी से संबंधित जनसूचना मांगी गई है जिसका जवाब 30 दिन में देना अनिवार्य होता होता है। लेकिन जन सूचना अधिकारी ने 30 दिन की अवधि पूर्ण होने पर ही नहीं 3 महीने हो जाने पर भी जनसूचना का जवाब नहीं दिया। शायद उक्त सूचना/जानकारी बाहर आने पर संपत्ति अधिकारी सुनील कुमार शर्मा अपने भ्रष्टाचार में खुद ही फंस सकते है। शायद यही मुख्य वजह हो सकती है भूखंड नीलामी प्रक्रिया की जानकारी से संम्बन्धित जनसूचना का जवाब देने से बचने के लिए। भ्रष्टाचारी जानता है कि जनसूचना का जवाब नहीं देने पर हद से हद 25000 रूपये का जुरमाना ही तो लगता है। भर देंगे। लेकिन जवाब नहीं देंगे। 

दरअसल आवास एवं विकास परिषद के संपत्ति अधिकारी कार्यालय में रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार और मनमाना रवैया पूरी तरह चरम पर है। जानकारी के अनुसार कुछ दिन पहले विभाग द्वारा की गई भूखंड नीलामी में आवास एवं विकास परिषद के संपत्ति अधिकारी सुनील कुमार शर्मा ने बड़ा खेल कर दिया था। इस खेल में कई अनियमितता बरतते हुए लाखों का भ्रष्टाचार हुआ था। अब भरष्टाचार के उस खेल का पर्दाफाश होने के डर से वही संपत्ति अधिकारी सुनील कुमार शर्मा जनसूचना के अंतर्गत मांगी गई सूचनाओं का 3 महीने बीत जाने के बाद भी जवाब देने को तैयार नहीं है। 

क्या है मामला: दरअसल कुछ दिनों पूर्व आवास एवं विकास परिषद ने जागृति विहार विस्तार योजना संख्या 11 में आवासीय भूखंडों की नीलामी की थी। जिसमें भूखंड संख्या 3/97 की नीलामी पिंटू पुत्र ओमपाल के नाम हुई थी। जिसकी संपूर्ण धनराशि पिंटू द्वारा परिषद कोष में जमा करने के साथ ही रजिस्ट्री कराने के लिए स्टांप पेपर भी खरीद लिए गए थे। लेकिन कुछ दिन बाद ही उक्त भूखंड को आरक्षित श्रेणी का बताकर नीलामी निरस्त कर दी गई।
 
इसके बाद इस मामले को लेकर पीड़ित पिंटू ने पहले तो लखनऊ तक शिकायत की। लेकिन इसके बाद भी जब सुनवाई नहीं हुई तो पीड़ित ने उच्च न्यायालय में एक वाद दायर कर दिया। लेकिन आवास एवं विकास परिषद के संपत्ति अधिकारी सुनील कुमार शर्मा वाद दायर होने के बावजूद उक्त भूखंड को दोबारा नीलामी प्रक्रिया में शामिल कराकर नीलाम कर दिया। यह घोर लापरवाही की श्रेणी में आता है। 

शिकायत का निस्तारण न होने पर पीड़ित पिंटू ने हाईकोर्ट में रिट दायर कर दी, जिस पर अभी सुनवाई चल रही है। लेकिन इसी बीच आवास एवं विकास परिषद के संपत्ति अधिकारी सुनील कुमार शर्मा ने फिर से खेल कर दिया और उक्त प्लॉट 3/97 को दोबारा से नीलाम प्रक्रिया में शामिल कर दिया और इस बार उसकी आरक्षित श्रेणी खोली गई। उक्त प्लॉट 22अगस्त 2025 को नीलाम कर दिया गया। ऐसे में इस विवादित प्लॉट जिसका मामला कोर्ट में चल रहा है, उसे दोबारा से बिना कोर्ट से वाद निस्तारित हुए दोबारा से नीलामी में शामिल करना न केवल कोर्ट की अवमानना का मामला बना रहा है, बल्कि यह भी दर्शा रहा है कि आवास एवं विकास परिषद में भ्रष्टाचार और अनियमितता चरम पर है।

अब इस पूरे मामले को लेकर पीड़ित पिंटू द्वारा लगातार संपत्ति अधिकारी कार्यालय से जनसूचना के अधिकार के तहत कुछ बिंदुओं पर जानकारी मांगी जा रही है। लेकिन संपत्ति अधिकारी सुनील शर्मा 3 माह बीतने के बाद भी कोई सूचना नहीं दे रहे हैं। जबकि इसका रिमाइंडर भी उनके द्वारा भेजा जा चुका है। पीड़ित पिंटू का कहना है कि उन्होंने पूरे मामले को मुख्यमंत्री को शिकायत भेजी है। इसके साथ ही वह सूचना न देने के खिलाफ राज्य सूचना आयुक्त के यहां अब वाद दायर करेंगे। क्योंकि यदि उन्हें सूचना मिलती है, तो वह उसके आधार पर अपनी आगे की लड़ाई लड़ सकते हैं। लेकिन संपत्ति अधिकारी उन्हें सही जानकारी देने से बच रहे हैं। ताकि उसे न्याय न मिल सके और संपत्ति अधिकारी के भ्रष्टाचार का पर्दाफाश न हो जाये। 

पीड़ित पिंटू का कहना है कि यदि उन्हें संपत्ति अधिकारी सूचना के अधिकार के तहत सूचना देते हैं, तो वह खुद अपने किए भ्रष्टाचार में निश्चित रूप से फंसेंगे। ऐसे में वरिष्ठ अधिकारी भी लगातार उन्हें संरक्षण प्रदान कर रहे हैं, क्योंकि परिषद के भीतर नीचे से लेकर ऊपर तक पूरी तरह भ्रष्टाचार व्याप्त है।

गौरतलब है कि सेंट्रल मार्किट में अवैध काम्प्लेक्स ध्वस्तीकरण और अन्य अवैध निर्माणों के चलते आवास एवं विकास परिषद् के अधीक्षण अधिकारी राजीव कुमार, अधिशासी अभियंता आफताब अहमद, सहायक अभियंता सौरभ कुमार एवं अवर अभियंता पर मुख्यमंत्री योगी के भ्रस्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत कड़ी कार्यवाही हो चुकी है। लेकिन इसके बावजूद आवास एवं विकास परिषद् के कुछ अन्य भ्रष्ट अधिकारी सुधरने का नाम नहीं ले रहे है। 

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