माधवपुरम सेक्टर-4 में पार्किंग की जगह पर बने अवैध निर्माण पर लगी सील हटाकर महावीर उपवन का ऑफिस शुरू, आवास विकास खामोश, सीएम योगी से शिकायत 

  • [By: Meerut Desk || 2026-04-02 13:18 IST
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माधवपुरम सेक्टर-4 में पार्किंग की जगह पर बने अवैध निर्माण पर लगी सील हटाकर महावीर उपवन का ऑफिस शुरू, आवास विकास खामोश, सीएम योगी से शिकायत 

मेरठ। जनपद में सुनामी की तरह अवैध निर्माण हो रहे है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और सुप्रीम कोर्ट की बेहद सख्ती के बावजूद अवैध निर्माणों का गैर क़ानूनी काम जोरो पर है। एशियन एक्सप्रेस लाइव हमेशा की तरह अवैध निर्माणों और अवैध कब्जों के ख़िलाफ़ मुखर होकर खबरे प्रकाशित करता रहा है। और अब निर्माण संबंधी नियमों को दरकिनार कर कार्यवाही से बचना आसान नहीं है। लेकिन आवास विकास परिषद् ने माधवपुरम सेक्टर-4 स्थित राजकीय इंटर कॉलेज के पास पार्किंग के लिए निर्धारित जमीन पर अवैध निर्माण खड़ा कर लिया गया। शिकायत होने पर आवास विकास परिषद् के क्षेत्रीय अधिशासी अभियंता ने अधीक्षण अभियंता राहुल यादव के नेतृत्व में इस अवैध निर्माण पर सील लगा दी थी। 

लेकिन सुप्रीम कोर्ट के अवैध निर्माण खिलाफ सख्त कार्यवाही के आदेश के बावजूद अवैध निर्माणकर्ताओं ने आवास विकास परिषद द्वारा लगाई गई सील को हटाकर प्रथम नवरात्रे के दिन शानदार तरीके से महावीर उपवन नामक अपना ऑफिस शुरू कर दिया। 

आवास विकास परिषद के अनुसार माधवपुरम योजना संख्या-10, सेक्टर-2 स्थित भूखंड संख्या 2/सीपी-1, सेक्टर-4 के भूखंड संख्या 840 पर सील लगाई गई थी। आवास विकास परिषद के अनुसार जांच के दौरान इस भूखंड पर नियम विपरीत निर्माण कार्य होने पर विभाग द्वारा सीलिंग की कार्यवाही की गई। लेकिन अब यह सीलिंग क्यों हटा दी गई यह मामला भ्रष्टाचार की और संकेत करता है। आसपास के लोगों का कहना है कि पार्किंग के लिए निर्धारित भूखंड पर ऑफिस खड़ा करना पूरी तरह से अवैध और गैरकानूनी है। जब आवास विकास परिषद ने इस अवैध निर्माण पर सील लगाई तो इस सील को तोड़ना या हटाना भी असंवैधानिक है। 

आवास विकास परिषद खंड-2 के अधिशासी अभियंता के अनुसार महावीर उपवन संचालक अवनीश गोयल द्वारा 13 मार्च 2026 को मानचित्र स्वीकृति के लिय आवेदन किया हुआ है। अर्थात अभी तक मानचित्र स्वीकृत नहीं हुआ है और सील को तोड़ दिया गया। दूसरी बात अगर संचालकों ने मानचित्र के लिए आवेदन किया है तो भी पार्किंग स्थल के लिय निर्धारित भूखंड पर कमर्शियल ऑफिस निर्माण हेतु आवेदन स्वीकृत भी नहीं किया जा सकता।

वास्तव में इस पूरे मामले में महावीर उपवन के संचालकों और आवास विकास परिषद के अधिकारियों के बीच क्या गुप्त समझौता हुआ है इसकी उच्च स्तरीय जांच होनी आवश्यक है।

प्रश्न यह है कि अगर आवास विकास परिषद ने इस अवैध निर्माण पर लगी सील को खुद हटाया है तो यह काम किस आधार पर किया गया है। क्योंकि पार्किंग के लिए निर्धारित भूखंड पर कोई कमर्शियल ऑफिस कैसे बनाया जा सकता है। दरअसल इस पूरे प्रकरण में भारी भ्रष्टाचार की बू आ रही है। 

इस अवैध निर्माण पर लगी सील हटाकर ऑफिस शुरू करने वाले संचालकों की सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिकायत की गई है।

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