अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के संयुक्त निदेशक शेषनाथ पांडे भ्रष्टाचार के मामले में बर्खास्त

  • [By: Lucknow Desk || 2026-03-06 14:37 IST
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अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के संयुक्त निदेशक शेषनाथ पांडे भ्रष्टाचार के मामले में बर्खास्त

लखनऊ। बड़े वित्तीय भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही के मामले में दोषी पाए जाने पर अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के संयुक्त निदेशक शेषनाथ पांडेय को योगी सरकार ने बर्खास्त कर दिया है। इसी के साथ अब शेषनाथ पांडेय को भविष्य में किसी भी सरकारी विभाग के लिए भी अयोग्य घोषित कर दिया गया है। 
गौरतलब है कि शेषनाथ पांडेय पर घोटालों की जांच रिपोर्ट के बाद और लोकसेवा आयोग की संस्तुति के सेवा के लिय अयोग्य घोषित कर बर्खास्त कर दिया गया है। गौरतलब है कि शेषनाथ पांडेय पर जांच के बाद 15 में से 14 मामले सिद्ध हो गए है।
अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में पिछले कुछ वर्षों से विभिन्न योजनाओं के नाम पर बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगते रहे थे। संयुक्त निदेशक शेषनाथ पांडेय के खिलाफ मुख्य रूप से छात्रवृत्ति वितरण, अल्पसंख्यक छात्रावासों के रखरखाव, निर्माण कार्यों और अन्य कल्याणकारी योजनाओं में गड़बड़ी के आरोप थे। शासन ने 2024 में इन आरोपों पर गहन विभागीय जांच शुरू की थी, जिसमें विशेष टीम ने दस्तावेजों, बैंक लेनदेन और लाभार्थियों के बयानों की जांच की। जांच में कुल 15 गंभीर आरोप लगाए गए थे, जिनमें से 14 आरोप पूरी तरह सिद्ध पाए गए।

क्या है मामला: उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के संयुक्त निदेशक शेषनाथ पांडेय को गंभीर वित्तीय एवं प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोप में बर्खास्त कर दिया गया है। शासन ने जांच पूरी होने के बाद लोक सेवा आयोग की सहमति और राज्यपाल की मंजूरी के बाद बर्खास्तगी का आदेश जारी कर दिया है। विभागीय जांच में कुल 15 आरोपों में से 14 आरोप सिद्ध पाए गए। यह कार्रवाई विभाग में भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के खिलाफ योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का हिस्सा मानी जा रही है।

वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा और जांच: अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में पिछले कुछ वर्षों से विभिन्न योजनाओं के नाम पर बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगते रहे थे। संयुक्त निदेशक शेषनाथ पांडेय के खिलाफ मुख्य रूप से छात्रवृत्ति वितरण, अल्पसंख्यक छात्रावासों के रखरखाव, निर्माण कार्यों और अन्य कल्याणकारी योजनाओं में गड़बड़ी के आरोप थे। शासन ने 2024 में इन आरोपों पर गहन विभागीय जांच शुरू की थी, जिसमें विशेष टीम ने दस्तावेजों, बैंक लेनदेन और लाभार्थियों के बयानों की जांच की। जांच में कुल 15 गंभीर आरोप लगाए गए थे, जिनमें से 14 आरोप पूरी तरह सिद्ध पाए गए।

विभागीय जांच पूरी होने के बाद मामला उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) को भेजा गया। आयोग ने आरोपों की गंभीरता को देखते हुए बर्खास्तगी की अनुशंसा की। इसके बाद शासन ने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से मंजूरी मांगी। राज्यपाल ने पूरी फाइल का अध्ययन करने के बाद बर्खास्तगी को मंजूरी दे दी। शासन ने आज विशेष आदेश जारी कर शेषनाथ पांडेय को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया।

जांच रिपोर्ट में शामिल प्रमुख आरोप इस प्रकार थे: छात्रवृत्ति राशि में हेराफेरी और फर्जी लाभार्थियों के नाम पर पैसे निकासी। अल्पसंख्यक छात्रावासों के निर्माण और रखरखाव में अनियमितता। विभागीय फंड का दुरुपयोग और व्यक्तिगत लाभ के लिए इस्तेमाल। दस्तावेजों में हेराफेरी और फर्जी बिल-पेपर तैयार करना। वरिष्ठ अधिकारियों को गुमराह करने के प्रयास। इनमें से 14 आरोप पूरी तरह सिद्ध होने के बाद शासन ने बर्खास्तगी का अंतिम निर्णय लिया।
शासन का सख्त रुख: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विभागीय भ्रष्टाचार पर लगातार जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में यह पहली बड़ी बर्खास्तगी है, जो संकेत देती है कि सरकार किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं करेगी। शासन ने कहा है कि जांच में शामिल अन्य संदिग्ध अधिकारियों और कर्मचारियों की जांच भी जारी है और जल्द ही उनके खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है।

राज्य सरकार ने आरोपी शेषनाथ पांडेय के भ्रष्टाचार के मामले को 23 फरवरी 2026 को लोक सेवा आयोग को भेजा था जहां से 28 फरवरी 2026 को आयोग ने आरोपी के खिलाफ दंड पर संस्तुति प्रदान कर दी। इसके बाद राज्यपाल की संस्तुति के बाद राज्य सरकार ने भ्रष्टाचार के आरोपी शेषनाथ पांडेय को भविष्य में किसी भी सरकारी नौकरी के लिय अयोग्य घोषित करते हुए सेवा से बर्खास्त कर दिया।

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