गैंगरेप केस से नाम हटाने को भ्रष्ट दरोगा धनंजय सिंह 2 लाख की रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ़्तार 

  • [By: Lucknow Desk || 2025-10-31 16:36 IST
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की बेहद सख्ती के बावजूद अधिकारी भ्रष्टाचार करने से बाज नहीं आ रहे है। एक नया मामला प्रदेश की राजधानी लखनऊ से  है। फर्जी रैप और गैंगरेप में लोगों को फंसाकर उनसे लाखों रूपये की वसूली करने वाला भ्रष्टाचारी दरोगा आखिर दो लाख रूपये की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ दबोचा गया और उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जेल की सलाखों के पीछे धकेल दिया गया। 

आप यह वीडियो देखिये जिसमे यह रिश्वतखोर दरोगा पचास पचास हजार की चार गड्डियां यानि दो लाख रूपये की रकम रिश्वत के तौर पर ले रहा है। हालांकि गैंगरेप के मुकदमे में से नाम हटाने के लिए इस दरोगा ने पांच लाख रूपये की भारी भरकर डिमांड की थी। 
 
जनपद की एंटी करप्शन टीम से पीड़ित प्रतिक गुप्ता आकर मिलता है। पीड़ित प्रतीक गुप्ता ने बताया कि पेपरमिल चौकी के इंचार्ज सब-इंस्पेक्टर धनंजय सिंह ने गैंगरेप केस में उसका नाम हटाने के लिए पहले 5 लाख रुपए की मांग की थी, बाद में 2 लाख में सौदा तय हुआ। 

एंटी करप्शन टीम के पास मामला पहुँचने के बाद टीम ने रिश्वतखोर दरोगा को रंगेहाथ गिरफ़्तार करने की योजना पर काम शुरू किया। एंटी करप्शन टीम ने पीड़ित शिकायतकर्ता प्रतीक गुप्ता की शर्ट में एक स्पाई कैमरा लगाया और उसे दो लाख रूपये लेकर चौकी भेजा गया। आप इस वीडियो में साफ देख सकते है कि पीड़ित प्रतीक गुप्ता ने दरोगा धनंजय सिंह की मेज पर दो लाख रुपए रखे, जिन्हें बेशर्मी से मुस्कुराते हुए भ्रष्ट दरोगा ने अपनी फाइल में रखवाया और बाद में टेबल के किनारे रख दिया। तभी वहां पर एंटी करप्शन टीम आ जाती है और रिश्वत लेने के आरोपी दरोगा धनंजय सिंह को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लेती है।  इसके बाद विजिलेंस टीम ने दरोगा की टेबल से दो लाख रूपये और फाइल को अपने कब्जे में ले लिया और मौके से तमाम सुबूत अपने कब्जे में ले लिए। 

एंटी करप्शन टीम की इस अचानक हुई कार्रवाई से पेपरमिल चौकी में हड़कंप मच गया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी दरोगा धनंजय सिंह को एंटी करप्शन ऑफिस लाया गया, जहां उससे पूछताछ के बाद उसे जेल भेज दिया गया। विभागीय स्तर पर भी आरोपी दरोगा के धनंजय सिंह के ख़िलाफ़ जांच शुरू कर दी गई है। 

गैंगरेप केस में फंसाने का आरोप पर पीड़ित कोचिंग संचालक प्रतीक गुप्ता ने बताई पूरी कहानी। प्रतीक गुप्ता ने बताया कि उसके यहां काम करने वाली एक लड़की ने चार महीने पहले नौकरी छोड़ दी थी। कुछ दिन बाद उसने महानगर थाने में गैंगरेप का मुकदमा दर्ज कराया और उसका नाम भी आरोपियों में शामिल कर दिया। प्रतीक गुप्ता का कहना है कि युवती ने उससे 50 लाख रुपये की मांग की थी और केस से बचने के लिए उसे ब्लैकमेल करने की कोशिश की। उसके बाद लड़की और उसके साथियों ने बयान बदलवाने की बात कही और 10 लाख में बात खत्म करने को कहा। इस सौदेबाजी के बीच में चौकी प्रभारी धनंजय सिंह ने भी गैंगरेप मामले में से प्रतीक गुप्ता का नाम हटाने के लिए 5 लाख की रिश्वत मांगी बाद में दरोगा ने 2 लाख रूपये में डील फाइनल कर दी। 

एंटी करप्शन टीम ने आरोपी दरोगा को रंगे हाथों दबोचकर पुलिस महकमे में मची गंदगी को उजागर किया। आला पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आरोपी दरोगा के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। वहीं इस कार्रवाई के बाद लखनऊ पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है।  विभागीय सूत्रों के अनुसार, आरोपी दरोगा धनजय सिंह के पुराने मामलों की भी जांच की जाएगी, ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसने पहले भी किसी से वसूली तो नहीं की। दरअसल लखनऊ में बीते कुछ महीनों से एंटी करप्शन टीम लगातार एक्टिव मोड़ में है। और कई भ्रष्ट पुलिसकर्मियों के खिलाफ कई मामले दर्ज किए गए हैं। दरोगा धनंजय सिंह की गिरफ्तारी इस मुहिम की अब तक की सबसे बड़ी सफलता मानी जा रही है। 

इसके साथ ही एंटी करप्शन अफसरों ने आम जनता से अपील की है कि कोई भी व्यक्ति यदि किसी अधिकारी या पुलिसकर्मी द्वारा रिश्वत मांगने की घटना का सामना करे, तो तुरंत शिकायत दर्ज कराए ताकि ऐसे भ्रष्ट अफसरों पर सख्त कार्रवाई हो सके। 

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