कलयुगी बेटे, बहू और पोते ने मिलकर 76 साल की बुजुर्ग, बीमार और चलने में लाचार माँ से करोड़ों रूपये अपने कब्जे में लेकर घर से निकाला

  • [By: Meerut Desk || 2025-07-10 15:03 IST
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कलयुगी बेटे, बहू और पोते ने मिलकर 76 साल की बुजुर्ग, बीमार और चलने में लाचार माँ से करोड़ों रूपये अपने कब्जे में लेकर घर से निकाला

सहारनपुर: इस कलयुग में माँ-बाप को दुष्ट और लालची औलाद का जुल्म सहना पड़ रहा है। जनपद के ब्रह्मपुरी कॉलोनी निवासी संजय आर्य नामक एक कलयुगी बेटे ने अपनी पत्नी विक्की उर्फ़ रजनी और अपने बेटे आयुष आर्य उर्फ़ हर्षित के साथ अपनी 76 साल की बुजुर्ग, बीमार और चलने में लाचार माँ को 15 जून 2025 को घर से धक्के देकर बाहर निकाल दिया।

एक दिन पूर्व बुजुर्ग महिला सुदेश आर्य की बड़ी बेटी भी देहरादून से अपनी माँ से मिलने के लिए आई थी। क्योंकि बेटे, बहू और पोते ने बूढी माँ का बहिष्कार ही नहीं कर रखा था लगभग एक महीने से रोटी तक नहीं दी थी जिसके चलते बुजुर्ग महिला की हालत ख़राब हो गई थी। लेकिन कलयुगी बेटे और तंत्र-मंत्र से लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वाली उसकी पत्नी विक्की उर्फ़ रजनी और अपने बेटे के साथ मिलाकर बूढी महिला -साथ अपनी बड़ी बहन को भी गाली-गलौच कर दोनों महिलाओं का सामान घर से बाहर फेंककर चुटकी बजाते हुए घर से बाहर निकालकर दरवाजा बंद कर लिया। 

बूढी और बीमार महिला घंटों तक अपनी बड़ी बेटी के साथ घर के बाहर एक पत्थर पर बैठी रही लेकिन कलयुगी औलाद ने दरवाजा नहीं खौला। आस-पास के लोग सिर्फ तमाशा देखते रहे दोनों महिलाओं की मदद को कोई भी आगे नहीं आया। 

जहां एक तरफ तो पोता अपनी दादी को कांवड़ में बिठाकर श्रवण कुमार की तरह हरिद्वार से पैदल जल ला रहा है वहीँ कलयुगी और लालची पोता आयुष उर्फ़ हर्षित आर्य ने अपनी दादी सुदेश आर्य की करोड़ों रूपये की प्रॉपर्टी बेचकर पैसा हजम करके घर से धक्के देकर बाहर निकाल दिया। 

दरअसल कुछ दिन पहले ही बुजुर्ग महिला ने गागलहेड़ी स्थित अपनी एक जमीन जिसपर कभी बीएसएनल का कार्यालय था का सौदा 63 लाख रूपये में कर दिया था। जिसमे से 40 लाख रूपये नगद बुजुर्ग महिला सुदेश आर्य के पुत्र संजय आर्य, उसकी पत्नी विक्की उर्फ रजनी और उन दोनों के पुत्र आयुष आर्य उर्फ़ हर्षित ने षड्यंत्र रचकर देहरादून में एक भूखंड ख़रीदा जिसका बैनामा बुजुर्ग महिला की पुत्रवधू विक्की उर्फ़ रजनी ने अपने नाम करा लिया और बैनामे के एक सप्ताह बाद ही 76 साल की बुजुर्ग, बीमार और चलने में लाचार सास को अपने पति और बेटे के साथ मिलकर घर से बाहर निकाल फेंका। 

इसके अलावा गागलहेड़ी स्थित उसी भूखंड में चार दुकानें भी थी। वे चारों दुकानें भी एक करोड़ रूपये से अधिक बेचकर सारा पैसा बुजुर्ग महिला के बेटे, बहु और पौते ने अपने कब्जे में कर लिया। इनमे ग़ौरतलब बात यह है कि इन तीनो में से कोई भी एक भी पैसा नहीं कमाता है। पूरी तरह से बुजुर्ग महिला की सरकारी नौकरी और फिर उसके बाद उसकी प्रॉपर्टी और पेंशन का सारा लाभ उक्त तीनों ही ले रहे थे। उसके बाद भी इन अहसानफरामोश और लालची लोगों ने 76 साल की बीमार और चलने में लाचार माँ को घर से बाहर निकाल दिया। 

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