तालिबान ने काट डाला अपने ही देश की फाइबर ऑप्टिक, इंटरनेट और टेलिकॉम सेवाएं बंद। 

  • [By: Pramod DaulatRam || 2025-10-02 12:04 IST
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तालिबान ने काट डाला अपने ही देश की फाइबर ऑप्टिक, इंटरनेट और टेलिकॉम सेवाएं बंद। 

पडोसी देश अफगानिस्तान की तालिबानी सरकार ने अफगानिस्तान में अनैतिकता पर लगाम लगाने के लिए पूरे देश में इंटरनेट सेवाओं को खत्म कर दिया।

सोमवार को अफगानिस्तान की तलिबानी सरकार के एक सरकारी आदेश के बाद देशभर में फैले फाइबर ऑप्टिक केबल को काट दिया गया है जिससे पूरा संचार ठप पड़ गया। फाइबर ऑप्टिक केबल कटने से अफगानिस्तान में इंटरनेट और टेलिकॉम सेवाएं पूरी तरह से बंद हो गई। इससे पुरे देश की तमाम एक्टिविटी थम गई। ग्लोबल इंटरनेट निगरानी संस्था नेटबलॉक ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि अफगानिस्तान में इंटरनेट कनेक्टिविटी सामान्य स्तर 1 फीसदी से भी कम रही। कम्युनिकेशन ब्लैकआउट के चलते अफगानिस्तान में बैंकिंग, ट्रेडिंग, शिक्षा, परिवहन, सीमा शुल्क तथा अन्य कई प्रकार की सेवाओं पर ब्रेक लग गए जिसके चलते अफगानिस्तान सरकार कई सौ करोड़ रूपये का नुकसान उठाना पड़ा। 

दरअसल तालिबान सरकार ने सितंबर महीने की शुरुआत से अफगानिस्तान में इंटरनेट बैन के खिलाफ कार्रवाई शुरू की थी। सरकारी आदेश जारी होने के बाद तालिबानी सरकार के अधिकारियों ने फाइबर ऑप्टिक केबल को काटने का अभियान शुरू कर दिया। इस अभियान का उद्देश्य 'अनैतिकता' पर लगाम लगाना अर्थात सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म्स पर तेजी से फेल रही इनमोरालिटी वल्गरिटी, न्यूडिटी पर पाबंदी लगाना था। 

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार 16 सितंबर 2025 को अफगानिस्तान के बल्ख प्रांत के प्रवक्ता अताउल्लाह जैद ने उत्तरी क्षेत्र में फाइबर ऑप्टिक सेवाओं को समाप्त कर दिया और कहा कि अन्य विकल्पों पर विचार किया जाएगा। यह पहला मौका है जब तालिबानी सरकार के आने के बाद देश भर में में संचार और इंटरनेट सेवाओं को पूरी तरह बंद किया गया है, जो लोगों के लिए भारी परेशानी का कारण बन रहा है। दरअसल अफगानिस्तानी युवा सोशल मीडिया के आदि  बनते जा रहे थे। जिसके चलते देश में सोशल मीडिया पर इनमोरालिटी वल्गरिटी, न्यूडिटी बड़ी तेजी से बढ़ती जा रही थी। इंटरनेट बैन होने से महिलाओं की शिक्षा और रोजगार और स्वास्थ्य को और बिगाड़ रहा है, क्योंकि पहले से ही तालिबान के शासन में ये समस्याएं बढ़ गई थीं। इसके परिणामस्वरूप इंटरनेट का ठप होना महिलाओं को शिक्षा और रोजगार के अवसरों से और दूर ले जाएगा। अब देखना यह है कि सरकार संचार सेवाओं के दूसरे विकल्पों पर कितनी ध्यान देती है। 

लेकिन आज के दौर में क्या इंटरनेट और टेलीकॉम सेवाओं के बिना सामाजिक और आर्थिक जीवन के बारे में सोचा जा सकता है। 

नमस्कार, मेरा नाम है पीके वर्मा 

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