सऊदी अरब और पाकिस्तान की डिफेंस डील के बाद भारत का अगला कदम

  • [By: Pramod DaulatRam || 2025-09-22 00:52 IST
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सऊदी अरब और पाकिस्तान की डिफेंस डील के बाद भारत का अगला कदम

इधर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिहार में चुनावी सभा में घुसपैठियों को देश से बाहर निकालने की बिहार की जनता को मोदी की गारंटी देने में मशरूफ रहे उधर पाकिस्तान ने सऊदी अरब पर डोरे डाल उसे अपने पाले में करते हुए एक कदम और आगे बढ़कर एक बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली। और सऊदी अरब के साथ एक ऐसी डील पर चिड़िया बिठा थी मतलब हस्ताक्षर कर दिए जिसे भारत के फेवर में तो कतई नहीं कहा जा सकता।
दरअसल पाकिस्तान और सऊदी अरब ने एक बड़ी डिफेंस डील पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसे NATO जैसा समझौता माना जा रहा है। इसके तहत किसी एक देश पर हमला होता है तो यह दोनों देशों पर हमला समझा जाएगा। बुधवार को क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस समझौते पर मुहर लगाई। इस डील के साथ ही मिडिल ईस्ट और साउथ एशिया की राजनीति में भयंकर हलचल मच गई है।एक तरफ जहां इसे पाकिस्तान की कूटनीति की जीत बताया जा रहा है वहीं दूसरी और सऊदी अरब की मजबूरी को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

जैसा कि आप जानते ही है कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद में पाकिस्तान और अमेरिका दोस्ती ने नई मिसालें पैदा की है। जिससे भारत को डायरेक्ट और इनडायरेक्ट नुकसान हुआ है। अमेरिका ने जहां पाकिस्तान को गले लगाया, आर्मी चीफ को खाने पर बुलाया दूसरी और भारत पर तारीफ में दोगुनी बढ़ोत्तरी कर दी। इससे आप खुद ही अंदाजा लगा सकते है कि 1947 में एक साथ आजाद हुए दो मुल्क और उनकी विदेश नीति में क्या उतर चढ़ाव आया है। वास्तव में पाकिस्तान इस समय अपनी बेहतरीन विदेश नीति के सबसे अच्छे दिनों के दौर में है। पाकिस्तान दुनिया के बड़े देशों को अपनी और आकर्षित करने में सफल हो रहा है।

अमेरिका के बाद सऊदी अरब हुआ पाकिस्तान पर मेहरबान क्यों हुआ। उसकी क्या मजबूरियां है। इसको समझने की जरूरत है। दरअसल सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच बुधवार को किए गए रणनीतिक पारस्परिक रक्षा समझौते का भारत के रणनीतिक और कूटनीतिक हितों पर दूरगामी प्रभाव पड़ने की संभावना जताई जा रही है। इस समझौते के अनुसार यदि कोई देश सऊदी अरब पर हमला करता है तो उस हमले को पाकिस्तान पर हमला माना जाएगा। और यदि कोई पाकिस्तान पर हमला करता है तो उसे सऊदी अरब पर हमला समझा जाएगा। माना जा रहा है कि सऊदी अरब ने परमाणु संपन्न देश पाकिस्तान के साथ यह समझौता इजरायल की मिडिल ईस्ट में बढ़ती आक्रामकता को देखते हुए किया है लेकिन पाकिस्तान जैसे पीठ पर चोट करने वाले देस के व्यवहार और बेपरवाह रवैए को देखते हुए भारत में इसे सीधे तौर पर अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़कर देखा जा रहा है। जानकारों की माने तो ऐसे हालात में मिडिल ईस्ट में भारत को अपनी नीति, कूटनीति और रणनीति पर नए सिरे से विचार करना चाहिए।

वैसे भी इन दिनों पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ सऊदी अरब के दौरे पर है। और इस दौरे के दौरान सऊदी अरब में  शाहबाज की क्राउन प्रिंस और प्राइम मिनिस्टर सलमान बिन अब्दुल्ला अजीज अल सऊद के साथ मीटिंग मेरानीति साझेदारी को लेकर डिफेंस समेत अन्य कई अहम समझौतों पर सहमति बनी फिर उस पर हस्ताक्षर किए गए। लेकिन इन समझौतों का मुख्य उद्देश्य पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच रक्षा सहयोग को बढ़ाना और किसी भी हमले के खिलाफ संयुक्त रूप से उस हमले के खिलाफ एक्शन लेना है।

लेकिन इन सब के बीच एक बात बहुत अहम है पाकिस्तान जैसे आतंकी देश पर सऊदी अरब आसानी से भरोसा कर सकता है।  क्या सऊदी अरब का भरोसा भारत से कम हो रहा है। सऊदी अरब पाकिस्तान से इस तरह की डील करके भारत को क्या संदेश देना चाहता है। यह भी बड़ा सवाल है।

नमस्कार मेरा नाम है पीके वर्मा

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