ईरानी अवाम के जुनून के सामने पस्त हुआ अमेरिका

  • [By: Pramod DaulatRam || 2026-04-18 13:10 IST
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ईरानी अवाम के जुनून के सामने पस्त हुआ अमेरिका

ईरान के साथ जंग में इजरायल अमेरिका को भी घसीट लाया। वैसे भी अमेरिका को दूसरों के फ़टो में टांग उलझाने की आदत है। लेकिन जब से अमेरिका ईरान के साथ जंग में सीधा घुस गया है, वह तभी से इस थोपी गई जंग से बाहर निकलना चाहता है। अपनी जान बचाना चाहता है। वह समझ गया है कि जिस ईरान को वह यह सोचकर लड़ रहा था कि ईरान अमेरिका के सामने जल्द ही सरेंडर कर देगा, यह उसकी बड़ी भूल साबित हुई। 

ईरान के पावर प्लांट्स पर ईरानी जन सैलाब को कौन भूल सकता है जिन्होंने अपने देश को बचाने के लिय अपनी जांच दाव पर लगा दी। जहां इस जुनून वाली आवाम रहती है क्या कोई भी ताकत ऐसे देश को हराने का या बर्बाद करने के बारे में सोच भी सकती। हरगिज़ नहीं।दरअसल ईरान की सेना नहीं बल्कि ईरान का एक एक नागरिक इस जंग में अपने देश के साथ खड़ा था। जबकि प्रेसिडेंट ट्रंप का कड़ा विरोध अमेरिकी ही कर रहे थे। ईरान का जज्बा उसका हौसला और अपने देश के लिए मर मिटने की ख्वाइशों ने अमेरिका और इजरायल के मंसूबों को पूरा नहीं होने दिया। जब अमेरिका ने ईरान के पावर प्लांट्स पर बमबारी का ऐलान किया तो ईरान की आवाम अपने पावर प्लांट्स को बचाने के लिए अपने देश का परचम लेकर रात में ही वहां इक्ट्ठी हो गई। यानी अपनी जान देकर अपने देश के पावर प्लांट्स को बचाने के लिय औरतें और बच्चे भी पावर प्लांट्स पर पहुंच गए। किसी देश की आवाम का यह जुनून ही उस देश की, उस मुल्क की सबसे बड़ी ताकत होता है। इसी इंसानी ताकत और हौंसले के चलते अमेरिका ईरान के पावर प्लांट्स पर बमबारी नहीं कर सका। और जंग खत्म करने के लिए ईरान की तमाम शर्तों को भी मानने के लिए तैयार हो गया था। 

इज़राइल और अमेरिका की बमबारी करके ईरान की जान मॉल का नुकसान तो किया जा सकता है लेकिन सैकड़ों साल पुरानी ईरानी कल्चर और सिविलाइजेशन को मिटाने की बात सोचना भी किसी पागलपन से कम नहीं। इंसान मर सकता है। इमारतें ध्वस्त की जा सकती है लेकिन किसी भी देश की कल्चर और सिविलाइजेशन को कोई छू भी नहीं सकता।

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एक बात और। जंग हमेशा हिम्मत, जुनून और हौसलों से जीती जाती है, यह ईरान ने दुनिया को दिखा दिया और सिखा दिया। आज दुनिया में सुप्रीम पावर कौन सा देश है यह बताने की जरूरत नहीं। दुनिया जान गई है। मालूम। 

नमस्कार। जयहिंद।

नोट: यह लेखक के अपने विचार है। 

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