बंगाल में राहुल गांधी की रैली को इजाजत नहीं मिलने पर भड़की कांग्रेस

  • [By: Pramod DaulatRam || 2026-04-22 21:49 IST
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बंगाल में राहुल गांधी की रैली को इजाजत नहीं मिलने पर भड़की कांग्रेस

बंगाल चुनाव में सभी राजनितिक दल धुआंधार प्रचार में व्यस्त है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, ममता बनर्जी, राहुल गाँधी और यूपी  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत अन्य नेता चुनावी रैलियां कर रहे है। बंगाल जनता को लुभाने का प्रयास कर रहे है। लेकिन आज बंगाल ममता बनर्जी सरकार ने कांग्रेस नेता राहुल गाँधी की चुनावी रैली की अनुमति नहीं दी। जिसके चलते कांग्रेस पार्टी ममता बनर्जी सरकार पर भड़क गई। कांग्रेस ने इसे ममता बनर्जी सरकार की घबराहट और 'राजनीतिक असुरक्षा' बताया है। दूसरी और टीएमसी ने चुनाव आयोग के नियमों का हवाला देकर अपना पल्ला झाड़ लिया।

दरअसल पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण से ठीक पहले राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। कांग्रेस पार्टी ने बुधवार को ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस यानि (टीएमसी) सरकार पर जमकर निशाना साधा। कोलकाता में राहुल गांधी की एक चुनावी रैली को प्रशासन द्वारा अनुमति नहीं दी जाने पर कोंग्रेसी नेता ममता सरकार पर भड़क गए। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कोलकाता के स्थानीय प्रशासन और विशेष रूप से पुलिस पूरी तरह से ममता बनर्जी सरकार के इशारे पर काम कर रही है। कांग्रेस का कहना है कि उन्होंने उन्होंने रैली की अनुमति के लिए शाम छह बजे तक इंतजार किया। लेकिन अनुमति न  मिलने के कारण अंत समय में रैली की तैयारियां करना संभव नहीं रह गया था।

 पश्चिम बंगाल कांग्रेस के अध्यक्ष शुभंकर सरकार का कहना है कि मालदा और मुर्शिदाबाद में राहुल गांधी की रैलियों में उमड़ी भारी भीड़ को देखकर टीएमसी और भाजपा घबरा गए हैं। इसी बौखलाहट में अब रैलियों के लिए जगह की अनुमति भी नहीं दी जा रही है।

सोशल मीडिया (X) पर कांग्रेस ने रैली की अनुमति नहीं देने पर कड़ी आपत्ति दर्ज की है। कांग्रेस ने कड़े शब्दों में लिखा: बंगाल ममता बनर्जी या टीएमसी की निजी जागीर नहीं है! राहुल गांधी के चुनाव प्रचार दौरे को रोकना प्रशासन की आड़ में छिपी उनकी राजनीतिक असुरक्षा है। अगर आपका जनादेश इतना मजबूत है, तो एक जनसभा से कैसा डर? बंगाल असली लोकतंत्र का हकदार है, पुलिस द्वारा नियंत्रित राजनीति का नहीं। 

इस पर पश्चिम बंगाल की मंत्री और टीएमसी नेता शशि पांजा ने कांग्रेस के इन आरोपों को खारिज किया और प्रशासनिक नियमों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि राज्य में चुनाव आचार संहिता लागू हो चुकी है। ऐसे में राज्य की 'कार्यवाहक सरकार' किसी भी रैली के रद्द होने के लिए जवाबदेह नहीं है। इसका जवाब चुनाव आयोग ही दे सकता है। पांजा ने स्पष्ट किया कि किसी भी जनसभा की अनुमति के लिए चुनाव आयोग के 'सुविधा पोर्टल' के माध्यम से आवेदन करना होता है और यह प्रक्रिया रैली से 2 से 7 दिन पहले पूरी करनी होती है। यह नियम सभी राजनीतिक दलों पर समान रूप से लागू होता है।

पश्चिम बंगाल चुनाव का राजनीतिक समीकरण क्या कहता है। दरअसल यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब पश्चिम बंगाल में एक बेहद कड़ा और हाई-वोल्टेज चुनावी मुकाबला देखने को मिल रहा है। राज्य में तृणमूल कांग्रेस लगातार चौथी बार सत्ता हासिल करने की कोशिश कर रही है, वहीं भाजपा पिछली बार से बेहतर प्रदर्शन कर सरकार बनाने की जुगत में है। कांग्रेस भी यहां टीएमसी के खिलाफ चुनाव लड़ रही है।

ग़ौरतलब है कि 2021 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस का राज्य में सूपड़ा साफ हो गया था। कांग्रेस ने जीरो सीटें जीती थी। लेकिन कांग्रेस इस बार टीएमसी और भाजपा के बीच चल रहे इस द्विपक्षीय मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की पूरी कोशिश कर रही है। राज्य की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए इस बार दो चरणों में मतदान होना है। पहले चरण की वोटिंग कल 23 अप्रैल और दूसरे चरण की वोटिंग 29 अप्रैल को होगी। वोटों की गिनती 4 मई को होगी। यानि 4 मई को क्लियर हो जायेगा कि बंगाल किसका होगा। 

जय हिन्द। 

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