आत्मघाती हमला था दिल्ली धमाका, डॉक्टर आतंकियों ने विस्फोट कर मासूमों के चीथड़े उड़ाए

  • [By: Pramod DaulatRam || 2025-11-13 00:20 IST
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10 नवंबर की शाम दिल्ली में हुए कार ब्लास्ट आतंकी हमले से एक बड़ी बात निकल कर सामने आई है। डॉक्टरी की पढाई इन आतंकियों ने बीमार लोगों को जिंदगी देने के लिए की होगी। लेकिन बीमार लोगों की जिंदगी बचाने वाले ये डॉक्टर आतंकी खुद ही बम विस्फोट करके लोगों की जान लेने लगे तो यह बहुत गंभीर विषय बन जाता है। यह चौकाने वाला विषय है। यह डराने वाला विषय है। और यह सोचने पर मजबूर करने वाला विषय है। 

नमस्कार मेरा नाम है पीके वर्मा। और आप देखना शुरू कर चुके है सिटीजन ऑफ़ द वर्ल्ड। 

10 नवंबर की शाम दिल्ली के लाल किले के पास एक चलती कार में विस्फोट हो गया। कार में विस्फोट होते ही चारों तरफ खून ही खून और धुआँ ही धुआँ फ़ैल गया। लाशों के चीथड़े इधर उधर बिखर गए। लोग रो रहे थे। चिल्ला रहे थे। सड़क में आने जाने वाले लोगो को यह सोचने का मौका ही नहीं मिला कि कुछ होने वाला है या यह क्या हो गया। अफरा तफरी मच गई। कुछ ही देर में घटना स्थल पर पुलिस और जाँच एजेंसी हरकत में आ जाती है और हर एंगल से जाँच शुरू हो जाती है। दिल्ली ब्लास्ट सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगता है। देश का हर नागरिक जानना चाहता था कि अचानक दिल्ली में क्या हो गया। 

दरअसल एक कार धीमी गति से चल रही थी। और फिर अचानक उस कार में ब्लास्ट हो जाता है। जिस तरह से चलती कार में ब्लास्ट हुआ इससे तो यही लगता है कि यह एक आत्मघाती यानि फिदाइन हमला था। यानी देश की राजधानी में फिदाइन हमला। यह बहुत गंभीर मामला है। सेंसिटिव मामला है। 

दिल्ली कार ब्लास्ट पर भारत के साथ अमेरिका, इजराइल और जापान के अलावा दुनियाभर के कई देश सामने आये जिन्होंने इस ब्लास्ट की निंदा की। 

खैर अभी बात हो रही है दिल्ली बम ब्लास्ट की। दरअसल 10 नवंबर की शाम करीब 6:52 बजे दिल्ली के लाल किले के पास लाल बत्ती पर आ रही एक धीमी गति से चलती गाड़ी में विस्फोट हुआ। इससे आस-पास के वाहन भी क्षतिग्रस्त हो गए हैं। बताया जा रहा है कि इस धमाके में दर्जनभर लोगों की मौत हो गई है। दिल्ली पुलिस, एफएसएल, एनआईए, एनएसजी समेत सभी एजेंसियां मौके पर पहुंच गई हैं। विस्फोट की हर पहलू से जांच की जा रही है। घटना के समय मौजूद लोगों ने बताया कि कार में विस्फोट से आसपास की दुकानों के शीशे और खिड़कियां टूट गईं। चारों तरफ सिर्फ चीख पुकार और खून ही खून। इंसानी लाशों के चीथड़े बिखरे पड़े थे। यह बम विस्फोट लाल किला मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर 1 के पास खड़ी एक कार में हुआ, जिसके बाद आसपास खड़ी अन्य गाड़ियों में भी आग लग गई। धमाके की आवाज इतनी तेज थी कि आसपास की दुकानों के शीशे और दरवाजे-खिड़कियां टूट गईं, जिससे लोगों में दहशत फैल गई। कार धमाके में कई अन्य लोग घायल हो गए। 

घटना के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की अमित शाह से बात कर घटना की जानकारी ली। होम मिनिस्टर अमित शाह ने तमाम एजेंसियों के आला अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय मीटिंग की और निर्देश दिया कि दिल्ली ब्लास्ट मामले के एक -एक आरोपियों और षडयंत्रकारियों को ढूंढ कर निकालो। 

दूसरी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पडोसी देश भूटान की दो दिवसीय राजकीय यात्रा पर है। भूटान की राजधानी थिम्पू में प्रधानमंत्री मोदी ने वादा किया कि दिल्ली के लाल किले के पास हुए कार विस्फोट के षड्यंत्रकारियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "आज मैं बहुत भारी मन से यहाँ आया हूँ। कल शाम दिल्ली में हुई भयावह घटना ने सभी को बहुत दुखी किया है। मैं प्रभावित परिवारों के दुःख को समझता हूँ। पूरा देश आज उनके साथ खड़ा है। मैं कल रात भर इस घटना की जाँच कर रही सभी एजेंसियों के संपर्क में था। हमारी एजेंसियाँ इस साजिश की तह तक पहुँचेंगी। इसके पीछे के षड्यंत्रकारियों को बख्शा नहीं जाएगा। सभी ज़िम्मेदार लोगों को न्याय के कटघरे में लाया जाएगा।"

राजधानी दिल्ली में हुए इस कार धमाके में अब तक नौ लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। इस घटना में 20 लोग घायल हुए हैं। अभी तक इस ब्लास्ट के पीछे के कारणों का पता नहीं चला है। लेकिन जांच एजेंसियां को डॉक्टर उमर नाम के व्यक्ति पर गहरा शक है। माना जा रहा है कि यह डॉक्टर कार में सवार था। इस डॉक्टर के तार फरीदाबाद टेरर मॉड्यूल से जुड़े हैं। यह ब्लास्ट हादसा है या फिर कोई साजिश, अभी तक जांच एजेंसियां इसको लेकर कुछ भी कहने की स्थिति में नहीं है। घटना की गहन और सघन जांच अभी जारी है। सभी एजेंसियां अपने-अपने स्तर पर जांच में जुटी हैं। अभी तक की जांच में यही बता चला है कि इस विस्फोट में आई20 कार का इस्तेमाल हुआ था। इस कार का नंबर हरियाणा का है और यह गाड़ी मोहम्मद सलमान के नाम रजिस्टर्ड थी।  हालांकि जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि इस कार को कई बार बेचा गया और ख़रीदा गया। दिल्ली में हुए विस्फोट की इस घटना से पहले सोमवार को ही जम्मू-कश्मीर पुलिस ने एक बड़े टेरर मॉड्यूल का पर्दाफाश किया था। 

लेकिन बड़ा सवाल यह है की जब देश मजबूत और सुरक्षित हाथों में है तो फिर चलती कार बम विस्फोट करने वाले दिल्ली में घुसे कैसे। राष्ट्रिय सुरक्षा सलाहकार कहां पर है। वह क्या कर रहे है। अगर देश वास्तव में मजबूत हाथों में ही है तो फिर ये दिल्ली ब्लास्ट, पहलगाव, पुलवामा जैसे हमले कैसे हो जाते है। एजेंसियां क्या करती रह जाती है। हमलावार अपना काम कर जाते है और एजेंसियां जाँच करती रहती है। जाँच चलती रहती है और चलती रहती है। पुलवामा और पहलगाव हमलों की जाँच का इंतजार सभी देश वासियों को है। 

लेकिन इस तरह का कार ब्लास्ट पहला नहीं है। मुंबई और पुलवामा में भी इसी तरह से कार में विस्फोटक रखकर ब्लास्ट किया गया था। लेकिन इस बार दिल्ली में हुए इस कार बलास्ट में जो बातें सामने आ रही है वह बहुत ही चौकाने वाली, डराने वाली और सोचने पर मजबूर करने वाली बात है। अब तक देख गया है कि फिदाइन हमला करने वाले या निर्दोष लोगों को मारने वाले आतंकी गरीब, अनपढ़-जाहिल और मुल्लाओं द्वारा ब्रेन वाश किये गए लोग होते थे। लेकिन इस बार जो नाम सामने आये है उनमे से पांच को डॉक्टर है। डॉक्टर उमर नबी बट, डॉक्टर आदिल अहमद राथर, डॉक्टर मुजिम्मल अहमद गनइ, डॉक्टर शाहिन और डॉक्टर सज्जाद अहमद मला। डॉक्टरी की पढाई इन लोगों ने इंसानियत की सेवा करने, बीमार लोगों को जिंदगी देने के लिए की होगी लेकिन बीमार लोगों की जिंदगी बचाने वाले खुद ही बम विस्फोट करके लोगों की जान लेने लगे तो यह बहुत गंभीर मसला बन जाता है। 

एक बात और यानि कितनी मेहनत करके और नीट का एग्जाम पास करके ये आतंकी डॉक्टर बने होंगे। यह सोचने वाला टॉपिक है। पिछले रिकॉर्ड देखने पर पता चलता है कि कई आतंकी और उनके सरगना इंजीनियर और प्रोफेसर भी रहे है। अगर अब इतने पढ़े लिखे आतंकी फिदाइन हमला करेंगे और इस्लाम जन्नत में 72 हूरों के नाम पर मासूमों का कत्ले आम करेंगे तो यह चौकाने वाला विषय है। यह डराने वाला विषय है। और यह सोचने पर मजबूर करने वाला विषय है। 

नमस कार। मेरा नाम है पीके वर्मा।

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