75 साल पूरे होने पर नैतिकता से झोला उठाकर चले जाने वाले प्रधानमंत्री का नाम नरेंद्र मोदी तो कतई नहीं हो सकता

  • [By: Pramod DaulatRam || 2025-09-10 12:09 IST
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75 साल पूरे होने पर नैतिकता से झोला उठाकर चले जाने वाले प्रधानमंत्री का नाम नरेंद्र मोदी तो कतई नहीं हो सकता

नरेंद्र मोदी के मई 2014 में प्रधानमंत्री बनने बाद देश में बहुत कुछ बदला गया। और बहुत कुछ थोपा गया। जिन-जिन के भाजपा नेताओं के पाव छूकर नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने, सबसे पहले मोदी ने उन्हें ही निपटाया। 75 साल की उम्र पार कर चुके अटल बिहारी वाजपेई और एल के आडवाणी की स्थापित की गई भारतीय जनता पार्टी के उन वरिष्ठ नेताओ को जिन्होंने भारतीय जनता  पार्टी की स्थापना की और फिर पार्टी को मजबूती के साथ पैरों पर खड़ा करने वाले नेताओं को सक्रीय राजनीति से बाहर कर दिया गया। घर बिठाए गए बड़े चेहरों में एलके आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, यशवंत सिंह, उमा भारती के अलावा दर्जन भर बड़े  नाम है। पार्टी के इन बुनियादी नेताओं से कहा गया कि आप 75 साल से ऊपर हो चुके है लिहाजा अब आप घर बैठो। 

ऐसा इसलिए क्योंकि नरेंद्र मोदी और अमितशाह एक नई भारतीय जनता पार्टी की नींव रखने वाले थे। जिसके सर्वेसर्वा सिर्फ और सिर्फ नरेंद्र मोदी और अमित शाह ही होने वाले थे। यदि कोई अन्य भाजपाई इसका पदाधिकारी होता तो वह सिर्फ होता, और सिर्फ होता, कर कुछ नहीं पाता ।क्योंकि भारतीय जनता पार्टी का पूरा रिमोट कंट्रोल सिर्फ नरेंद्र मोदी और अमितशाह के हाथ में था। और ऐसा ही हुआ। देश ने इन 10-11 सालों में देश की सत्ता पक्ष और विपक्ष की राजनीति में जो देखा वह 2014 से पहले न तो कभी देखा गया और न ही कभी सुना गया। 

अब मुद्दे पर आते है। दरअसल 17 सितंबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जीवन के 75 साल पुरे करके 76वे साल में प्रवेश करेंगे। हजारों लाखों ही नहीं करोडो लोग यह अनुमान लगाकर बैठे है कि भाजपा के वरिष्ठ नेताओं को 75 पुरे होते ही घर पर बिठाने वाले नरेंद्र मोदी भी शायद एक मिशाल पेश करते हुए कि भाजपा में नियम सभी के लिया एक सामान है, वह स्वेच्छा से और नैतिक आधार पर 17 सितंबर को प्रधानमंत्री पद छोड़ देंगे। ऐसा सोचकर अगर आप कोई हसीन ख्वाब देख रहे है तो याद रखे हर हसीन ख़्वाब कभी पूरा नहीं होता।

इस सब के बावजूद, प्रधानमंत्री ऑफिस में बड़ी हलचल का माहौल है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 सितंबर से पहले निर्धारित अपनी अहम् विदेश यात्रा को कैंसिल कर दिया है। उपराष्ट्रपति के चुनाव के मद्देनजर एनडीए के सभी सांसदों को रात्रि भोज पर बुलाने का कार्यक्रम भी रद्द किया जा चुका है। हालांकि नरेंद्र मोदी और अमितशाह की भारतीय जनता पार्टी ने उप राष्ट्रपति का चुनाव जीत लिया है। जिसके चलते विपक्षी दलों के तमाम दावे और भविष्यवाणी धरी की धरी रह गई। यह अलग मुद्दा है। असली मुद्दे पर आते है।

इसका मतलब साफ नजर आता है कि नरेंद्र मोदी के जन्मदिन 17 सितंबर 2025 को कुछ बड़ा होने वाला है। लेकिन देश को यह भी नहीं भूलना चाहिए कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और होम मिनिस्टर अमितशाह ऐसी शख्सियत है जिनके डिसिशन्स और अनाउंसमेंट को इन दोनों के अलावा तीसरा कोई इंसान तो छोड़ो किसी भी दिवार का कोई भी कान न तो सुन सकता है और न ही समझ सकता है। इस मामले में नरेंद्र मोदी और अमित शाह कबीले-तारीफ़ है। ख़ैर। 

बात प्रधानमंत्री के 75 साल पूरे होने की है। क्या यह नियम पूरी भाजपा पर लागू होता है या नरेंद्र मोदी ओर अमितशाह को छोड़कर तमाम भाजपा नेताओं पर लागू होता है। यह आने वाले कुछ दिनों में साफ हो जाएगा। एक दमदम साफ। मालूम।

लेकिन एक बात कभी नहीं भूलनी चाहिए कि साम, दाम, दंड, भेद से पाई सत्ता को अगर प्रधानमंत्री सिर्फ नैतिकता के आधार पर छोड़कर झोला उठाकर चले जाये तो ऐसे प्रधानमंत्री का नाम नरेंद्र मोदी कतई नहीं हो सकता। ऐसा सिर्फ जापान और नेपाल के प्रधानमंत्री ही कर सकते है। महा मानव नहीं।

जन्मदिवस की ढ़ेरो शुभकामनाएं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी। 

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