महिला आरक्षण बिल के पीछे की साजिश

  • [By: Pramod DaulatRam || 2026-04-22 00:13 IST
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महिला आरक्षण बिल के पीछे की साजिश

मेरे पास 543 लडडू है। इनमें से मैं लड्डू महिलाओं को नहीं दूंगा। पहले मुझे 850 लडडू लाकर दो उसके बाद ही मै इनमें से आधे लडडू महिलाओं को दूंगा वरना नहीं। आज कल कुछ ऐसा ही मजाक चल रहा है।

महिला आरक्षण बिल महिलाओं के लिए ही लाया जा रहा है या इसके पीछे कोई और वजह है या कोई नया मास्टरस्ट्रोक। जबकि महिला आरक्षण बिल तो 2023 में पारित किया जा चुका है जिसे पारित कराने में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके, टीएमसी और तमाम विपक्षी दलों ने अहम भूमिका निभाई थी। प्रधानमंत्री मोदी ने इस महिला आरक्षण बिल के पारित होने पर गुजरात में रोड शो भी निकाला था।

तो अब जो बिल मोदी सरकार संसद में पारित नहीं करा सकी यह कौन सा बिल था। क्या यह महिला आरक्षण बिल नहीं था। दरअसल यह अमेंडमेंट था जिसके मुताबिक दक्षिण भारत की लोकसभा की सीटें कम करनी थी क्योंकि वहां पर बीजेपी जीत नहीं पा रही थी। और उत्तर भारत में सीटों को बढ़ाना था क्योंकि यहां बढ़ती जनसंख्या के प्रतिशत आंकड़ों के मुताबिक यह बीजेपी के लिए सालों तक जीत का परचम लहराना है।

इसका मतलब यह है कि यह महिला आरक्षण एमेंडमेंट बिल पारित करा कर आने वाले सालों में अपनी सीटें बढ़ाकर अपनी जीत को कायम रखना था। विपक्ष मोदी सरकार की इस मंशा को भली भांति समझ गया था इसलिए पूरे विपक्ष ने एकजुट होकर इस बिल को खारिज कर दिया। 2014 से यह पहली बार हुआ है जब मोदी सरकार अपना बिल संसद में पारित नहीं करा सकी। पहली बार मोदी सरकार का कोई बिल धड़ाम से गिर पड़ा।

इसके बाद 18 अप्रैल शाम 8:30 मिनट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को संबोधित किया और अपने पूरे भाषण में कांग्रेस को कोसते रहे। देश की जनता इस उम्मीद में थी देश को संबोधित करने में देश की किसी समस्या, खड़ी युद्ध के चलते गैस, तेल की शॉर्टेज आदि पर प्रधानमंत्री मोदी कुछ बोलेंगे। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने देश को संबोधित कर इसे एक प्रोपोगंडा, एक चुनावी भाषण जैसा बना दिया। शायद प्रधानमंत्री मोदी से इससे अधिक उम्मीद भी देश की जनता ने नहीं की होगी। कई राज्यों में विधानसभा चुनाव चल रहे है। शायद प्रधानमंत्री के लिय यह अच्छा मौका था कांग्रेस, टीएमसी समेत अन्य विपक्षी दलों को महिला आरक्षण विरोधी सिद्ध करने का।

इस महिला आरक्षण बिल की आड़ में अलग ही खेल खेला जाना था। वर्तमान में लोकसभा में 543 सीटें है जिन्हें बढ़ाकर 850 तक करने की योजना है। आसान शब्दों में भाजपा बहुल क्षेत्रों में सीटें बढ़ाना और विपक्ष बहुल क्षेत्रों में सीटें घटाना। बिल्कुल सीधा कैलकुलेशन। यदि ऐसा हो जाता है तो फिर भाजपा को चुनावी रण में हराना बहुत ही मुश्किल हो जाता।

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