आजम खान करेंगे हाथी की सवारी

  • [By: Pramod DaulatRam || 2025-09-24 12:22 IST
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आजम खान जेल से बाहर आकर कौन सी राह पकड़ने वाले है। उत्तर प्रदेश की सीतापुर जेल में 23 महीने से अधिक रहने के बाद आजम खान ने खुली हवा में सांस ली। रिहाई के दिन आजम खान का बेटा अब्दुल्ला सुबह सात बजे ही जेल के दरवाजे पर पहुंच गया था। आजम खान पर सौ से भी अधिक मुकदमे दर्ज़ किए गए थे। उन मुकदमों में सरकारी जमीन पर कब्जे से लेकर भड़काऊ भाषण देना, फर्जी बर्थ सर्टिफिकेट से लेकर बकरी चोरी करने तक के आरोप थे। खैर अब आजम खान को इन सभी मुकदमों में जमानत मिल चुकी है। गौर करने वाली बात यह है कि कई मुकदमों के दावे खोखले और बेबुनियाद निकलें जिनका कोई आधार नहीं था।

आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि जिस आजम खान की उत्तर प्रदेश की सियासत में तूती बोलती थी उस आजम खान पर कुल १०४ मुकदमे दर्ज थे। इन मुकदमों में २२ मामले तो १२ जुलाई २०१९ को दर्ज किए गए। शायद यह सब आजम खान को सियासी तौर पर खत्म करने के लिए किया गया। सियासी जानकारों की माने तो आजम खान के समाजवादी पार्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से भी रिश्ते कुछ खास नहीं थे। अखिलेश यादव ने आजम खान को जेल से निकलवाने में आजम खान एंड फैमली की कोई मदद नहीं की। और यह बात सभी जानते है कि समाजवादी पार्टी की स्थापना मुलायम सिंह यादव ने आजम खान के साथ मिलकर ही की थी। लेकिन मुलायम सिंह की मृत्यु के बाद आजम खान को समाजवादी पार्टी में वो तव्वजो और सम्मान नहीं मिला जी मुलायम सिंह के जिंदा रहते मिलता था। खैर आजम खान अब इन बातों से बहुत दूर निकल आए है। वक्त बदल चुका है। इन्सान बदल चुका है और सियासत बदल चुकी है।

कहा जा रहा है कि आजम खान के जेल से बाहर आने से पहले उनकी पत्नी की दिल्ली में उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के साथ एक गोपनीय मुलाकात हुई है। जिसमें शायद जेल से बाहर आने के बाद आजम खान के लिए बहुजन समाज पार्टी में लाल कार्पेट बिछाने की कयावद की जा रही हो। उत्तर प्रदेश के सियासी जानकारों की माने तो आजम खान बसपा के हाथी पर सवार हो सकते है। सूत्रों के अनुसार यह भी माना जा रहा है कि अखिलेश यादव के मुसलमान वोटर्स को तोड़ने के लिए और अखिलेश यादव को उत्तर प्रदेश में कमजोर करने के लिए आजम खान को जेल से निकाला गया है। आप जानते ही है कि २०२४ के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी देश की तीसरी बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। यह बात भाजपा को बुरी तरह से खटक रही है। आजम खान मुसलमानों के बड़े नेता है। यह बाद लखनऊ भी जनता है और नई दिल्ली भी।

लेकिन अब उत्तर प्रदेश की सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की पैनी नजर आजम खान पर लगी है कि वह हाथी की सवारी करते है या वापस साइकिल की सवारी करते है। आजम खान का फैसला सत्ता पक्ष और विपक्ष की रणनीतियों को बहुत अच्छी तरह से प्रभावित करने वाला है।

नमस्कार, मेरा नाम है पीके वर्मा

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