तो जिंदा हो तुम: डॉ पीके वर्मा

- [By: AE Live || 2024-06-19 16:52 IST
- 23
ग़र तुममे है जोश, कुछ करने का, कुछ पाने का
तो जिंदा हो तुम, तो जिंदा हो तुम।
ग़र तुममे है जज़्बा, मरकर भी जिए जाने का
तो जिंदा हो तुम, तो जिंदा हो तुम।
ग़र तुममे है आसमान को छूने की चाहतें
तो जिंदा हो तुम, तो जिंदा हो तुम।
ग़र तुममे है समुन्द्र की गहराइयों को छूने का जोश
तो जिंदा हो तुम, तो जिंदा हो तुम।
ग़र तुममे है गिरकर उठने का हौंसला
तो जिंदा हो तुम, तो जिंदा हो तुम।
ग़र जिंदगी को जिंदगी की तरह चाहते हो जीना
तो जिंदा हो तुम, तो जिंदा हो तुम।
ग़र चाहते हो परिंदों की तरह खुले आसमां में उड़ना
तो जिंदा हो तुम, तो जिंदा हो तुम।
क्योंकि जिन्दा केवल निंदा लोग ही रहते है
मुर्दें नहीं।
-डॉ पीके वर्मा
(17/12/2012)
RELATED TOPICS
वो हर इक बात पर कहना कि यूँ होता तो क्या होता
तुम्हारे पाँव के नीचे कोई ज़मीन नहीं (काव्य): दुष्यंत कुमार
बड़े लोगों से मिलने में हमेशा फ़ासला रखना: बशीर बद्र
हर इक जिस्म घायल हर इक रूह प्यासी: साहिर
कारवाँ गुज़र गया ग़ुबार देखते रहे: नीरज
ये कैसा इश्क़ है उर्दू ज़बां का: गुलज़ार
मुझे अब डर नहीं लगता (नज़्म)
वो पुराना कोट (काव्य): डॉ पीके वर्मा
मुझको इतने से काम पे रख लो: गुलज़ार
मंज़िलें लाख कठिन आएँ गुज़र जाऊँगा
मैं पयंबर तो नहीं, हूं तो पयंबर जैसा
तुम झूठ को सच लिख दो अख़बार तुम्हारा है
वो पुराना कोट: डॉ पीके वर्मा
ये तुम्हारे होंठ हैं या ग़ुलाब की पंखुड़ी दो: डॉ पी के वर्मा
हमेशा देर कर देता हूँ मैं (नज़म)
कर लूंगा जमा दौलत ओ जऱ ...उसके बाद क्या
सिंहासन खाली करो कि जनता आती है: रामधारी सिंह दिनकर
हम को मिटा सके ये ज़माने में दम नहीं: -जिगर मुरादाबादी
वो क्यूं गया है, ये बताकर नही गया (ग़ज़ल)
जब तक सांस आखिरी बाकी है मैं चलता रहूंगा: डॉ पीके वर्मा
तू किसी रेल सी गुज़रती है मैं किसी पुल सा थरथराता हूँ (कविता)
कैफियत हर एक इंसान की नजर आती है मुझे (कविता)
दिल का दरवाजा तो खोल, मुझे भीतर तो आने दे (कविता)
अचानक एक चमक की तरह तुम मेरे सामने चमक जाती हो (कविता)
Princess of Beauty: While the time of my college, her house... (Poem)
चाँद को धरा पर लाना हैं तुम्हें (कविता)
Passionate Lips (Poem)
Send Me A Kiss :Poem by Dr. P.K. Verma
A Fairy On The Earth : Poem by Dr. P.K. Verma
Pen, you are not merely a tool (Poem)
1982 में आयरन लेडी इंदिरा गांधी से मेरी पहली और आखिरी मुलाकात: डॉ पी के वर्मा
ऐ जिंदगी, तुझे पाने की कशमकश में (कविता)
टूटे पत्ते (कविता)

वो हर इक बात पर कहना कि यूँ होता तो क्या होता
मुझे अब डर नहीं लगता (नज़्म)
मुझको इतने से काम पे रख लो: गुलज़ार
मंज़िलें लाख कठिन आएँ गुज़र जाऊँगा
वो पुराना कोट: डॉ पीके वर्मा
ये तुम्हारे होंठ हैं या ग़ुलाब की पंखुड़ी दो: डॉ पी के वर्मा
जब तक सांस आखिरी बाकी है मैं चलता रहूंगा: डॉ पीके वर्मा
दिल का दरवाजा तो खोल, मुझे भीतर तो आने दे (कविता)
चाँद को धरा पर लाना हैं तुम्हें (कविता)
A Fairy On The Earth : Poem by Dr. P.K. Verma